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सड़क पर नमाज पढ़ने से रोकने पर प्रदर्शन कर रही भीड़ ने जमकर किया पथराव पुलिस ने भी किया लाठीचार्ज

स्टार न्यूज़ टेलिविजन

राकेश पाण्डेय:  ब्यूरो रिपोर्ट:कोलकाता के पार्क सर्कस राजाबजार इलाके में उस वक्त तनाव फैल गया जब एक भीड़ ने सड़क पर नमाज पढ़ने पर प्रतिबंध के फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आयोजन में बवाल हो गया।

इस दौरान हुड़दंगियों ने पथराव करके पुलिस को पीछे धकेलने की कोशिश की. अचानक भारी पथराव से भड़की पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए तबीयत से लाठीचार्ज किया. पुलिस ने अभी तक इस घटना पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है, हालांकि रिपोर्टों के अनुसार कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है. यह बवाल मुस्लिम बहुल पार्क सर्कस इलाके के सात-मार्ग जंक्शन पर हुआ.

*ट्रैफिक जाम होने से पहले पहुंची पुलिस*

समुदाय विशेष के लोगों के भारी विरोध प्रदर्शन के चलते ट्रैफिक जाम होने ही वाला था, तभी बड़ी संख्या में पुलिस और सीआरपीएफ के जवान मौके पर पहुंचे. उन्होंने भीड़ को तितर-बितर करने की कोशिश की. इसके बाद हिंसक झड़प हुई, जिसमें कथित रूप से पुलिस पर भारी पत्थर फेंके गए. दंगाइयों ने वहीं खड़ी सीआरपीएफ की बस को निशाना बनाया. आरोपियों ने कई जगह जमकर पथराव किया. पत्थर फेंककर तोड़फोड़ की.

पुलिस ने स्थिति को काबू में करने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया।

*कोलकाता के राजबाजार में विरोध*

कोलकाता के राजबाजार क्षेत्र में भी शुक्रवार को तनाव फैल गया, जब मुसलमानों ने हाल ही के प्रतिबंध के बावजूद सड़क पर नमाज़ अदा करने की कोशिश की. जब भारी पुलिस बल वहां पहुंचे और लोगों से सड़क खाली करने को कहा, तो स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई. लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में मुसलमान लंबे समय से शुक्रवार की नमाज सड़क पर अदा करते आए हैं. प्रदर्शनकारियों ने तर्क दिया कि यह एक परंपरा है जो सालों से चली आ रही है. जबकि प्रशासन का कहना है कि सार्वजनिक मार्गों को खाली रखना कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी है.

*उत्तर प्रदेश के मॉडल पर चला पश्चिम बंगाल!*

पश्चिम बंगाल बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री सुभेंदु अधिकारी ने अपनी कैबिनेट बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मुस्लिम प्रार्थनाएं केवल मस्जिदों के अंदर अदा की जानी चाहिए. वहीं सार्वजनिक सड़कों, जिनमें कोलकाता की ऐतिहासिक रेड रोड भी शामिल है, वहां ऐसे किसी भी आयोजन को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

यूपी में 2017 में बीजेपी की प्रचंड बहुमत वाली सरकार आई और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने, तब उसके बाद सभी प्रबुद्ध नागरिक सड़कों के बजाए मस्जिदों में जाकर ही नमाज पढ़ने लगे. ऐसा लगता है शुभेंदु सरकार भी योगी मॉडल पर चल रही है.

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