
कानून तोड़ने वालों में रहेगा डर, छोटे अपराधों पर अब नरमी—राज्यसभा में बोले पीयूष गोयल
वीना टंडन
नई दिल्ली। राज्यसभा में गुरुवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कानून में प्रस्तावित बड़े सुधारों पर जोर देते हुए कहा कि जो लोग जानबूझकर कानून तोड़ेंगे, उनके मन में डर बना रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य सख्त कानून और आसान प्रक्रियाओं के बीच संतुलन बनाना है।
मंत्री ने बताया कि इस विधेयक के जरिए नागरिकों को पर्याप्त सुरक्षा देने के साथ-साथ तेज और आनुपातिक दंड की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने यह भी साफ किया कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट जैसे महत्वपूर्ण कानूनों को कमजोर नहीं किया जाएगा। बिना अनुमति नकली दवाओं का निर्माण, आयात या बिक्री करने वालों के लिए कड़ी आपराधिक सजा का प्रावधान बरकरार रहेगा।
सरकार के इस नए कानून का उद्देश्य “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” और “ईज़ ऑफ लिविंग” को बढ़ावा देना है। इसके तहत 23 मंत्रालयों से जुड़े 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव है। इनमें से 717 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और 67 में बदलाव कर प्रक्रियाओं को सरल बनाने की योजना है।
इस विधेयक के तहत 1000 से अधिक अपराधों को तर्कसंगत बनाने, पुराने और अनावश्यक नियमों को हटाने और नियामक व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। छोटे, तकनीकी और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के लिए अब जेल की सजा की बजाय जुर्माना या चेतावनी देने का प्रावधान किया जाएगा।
नई व्यवस्था में पहली बार गलती करने वालों को चेतावनी, जबकि गंभीर मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही दंड को अपराध की गंभीरता के अनुसार तय किया जाएगा।
तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक अधिकारियों की नियुक्ति और अपीलीय प्राधिकरणों की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है, जिससे मामलों का जल्द निपटारा हो सके और अदालतों पर बोझ कम हो।
इसके अलावा, विधेयक में नई दिल्ली नगर परिषद अधिनियम 1994 और मोटर वाहन अधिनियम 1988 में भी कुल 67 संशोधन प्रस्तावित किए गए हैं।
सरकार का मानना है कि यह कदम देश में पारदर्शी, सरल और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगा।

