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दिल्ली की दमघोंटू हवा पर सियासी घमासान, सीएम रेखा गुप्ता का पड़ोसी राज्यों पर गंभीर आरोप

पराली जलाने को बताया जानबूझकर की जा रही साजिश, राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर फिर गरमाई राजनीति

वीना टंडन
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता और जहरीली होती हवा के बीच प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ राज्यों में जानबूझकर पराली जलाई जा रही है, जिसका सीधा असर दिल्ली की हवा पर पड़ रहा है। मुख्यमंत्री के इस बयान से प्रदूषण को लेकर दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के आसार हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या का समाधान केवल राजधानी तक सीमित प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए केंद्र सरकार और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के पड़ोसी राज्यों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार का सहयोग मिल रहा है और एनसीआर के राज्यों के बीच साझा मंच पर प्रदूषण नियंत्रण को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।

पराली के धुएं पर पंजाब सरकार को घेरा

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने बयान में पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कुछ राज्य पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए अपेक्षित इच्छाशक्ति नहीं दिखा रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार ऐसा महसूस होता है कि जानबूझकर पराली जलने दी जाती है, ताकि उसका धुआं दिल्ली तक पहुंचे और बाद में राजनीतिक बयानबाजी की जा सके। हालांकि, ये मुख्यमंत्री के आरोप हैं, जिन पर संबंधित राज्य सरकारों का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।

दिल्ली सरकार का 360 डिग्री प्रदूषण नियंत्रण प्लान

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए बहुआयामी रणनीति पर काम कर रही है। इसमें स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा, जैव ईंधन, हरित क्षेत्र का विस्तार और धूल नियंत्रण जैसे उपाय शामिल हैं।

उन्होंने दावा किया कि दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन बेड़े को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2029 तक दिल्ली में 14 हजार इलेक्ट्रिक बसें संचालित करने का है। इसके अलावा कचरे और गोबर से ऊर्जा तैयार करने के लिए तीन बड़े बायोगैस प्लांट स्थापित किए गए हैं, ताकि खुले में कचरा और अन्य अपशिष्ट जलाने की समस्या को कम किया जा सके।

70 लाख पौधे लगाने और रिज क्षेत्र को वन घोषित करने का दावा

रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए 70 लाख पौधे लगाने का अभियान चलाया गया है। रिज क्षेत्र को वन के रूप में अधिसूचित किया गया है। इसके साथ ही सड़कों और निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदूषण के सभी स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई करके ही राजधानी की हवा को स्वच्छ बनाया जा सकता है।

दिल्ली की हवा गंभीर श्रेणी में, लोगों की बढ़ी चिंता

बुधवार सुबह राजधानी की वायु गुणवत्ता ने चिंता बढ़ा दी। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 605 तक पहुंच गया था। वहीं, इससे पहले मंगलवार को एक्यूआई 350 दर्ज किया गया था, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां भी प्रदूषकों के फैलाव में बाधा बन रही हैं।

प्रदूषण पर भाजपा और आप के बीच आरोप-प्रत्यारोप

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा भी पंजाब सरकार पर लगातार हमलावर हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के बजाय उन्हें बढ़ावा दिया जा रहा है। सिरसा ने दावा किया कि 26 अक्टूबर से एक नवंबर के बीच पंजाब में पराली जलाने की 900 से अधिक घटनाएं सामने आईं, जबकि हरियाणा और उत्तर प्रदेश में इनकी संख्या काफी कम रही।

दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी ने भाजपा नेताओं पर पंजाब के किसानों को निशाना बनाने और दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण की विफलताओं से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है। इस तरह राजधानी में जहरीली होती हवा के बीच प्रदूषण का मुद्दा अब पर्यावरण के साथ-साथ राजनीतिक टकराव का विषय भी बन गया है।

फैक्ट बॉक्स

* दिल्ली में बुधवार सुबह एक्यूआई 605 तक पहुंचने की रिपोर्ट।

* मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पड़ोसी राज्यों पर पराली जलाने को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

* दिल्ली सरकार का 2029 तक 14 हजार इलेक्ट्रिक बसों का लक्ष्य।

* सरकार ने 70 लाख पौधे लगाने का दावा किया।

* तीन बड़े बायोगैस प्लांट स्थापित किए जाने की जानकारी दी गई।

* पंजाब में पराली जलाने को लेकर भाजपा और आप के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज।

सवाल वही है कि दिल्लीवासियों को जहरीली हवा से राहत कब मिलेगी? राजनीतिक आरोपों से आगे बढ़कर केंद्र और राज्य सरकारों को मिलकर प्रदूषण के सभी स्रोतों पर ठोस कार्रवाई करनी होगी। आखिर राजधानी के करोड़ों लोगों का स्वास्थ्य किसी भी राजनीतिक लड़ाई से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है।

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