
इंस्टाग्राम पर आपत्तिजनक विज्ञापनों से हड़कंप, केंद्र सरकार ने मेटा से 7 दिन में मांगा जवाब
वीना टंडन
नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण और अश्लील सामग्री से जुड़े विज्ञापनों के सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकार ने मेटा को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी विज्ञापन और लिंक तत्काल ब्लॉक किए जाएं, जो अवैध सामग्री तक पहुंच आसान बनाते हैं। साथ ही कंपनी से इस गंभीर मामले पर सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण भी मांगा गया है।
बीबीसी की जांच में हुआ खुलासा
यह मामला बीबीसी आई की खोजी रिपोर्ट के बाद सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, इंस्टाग्राम पर कई सशुल्क विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों तक भेजा जा रहा था। जांच में दावा किया गया कि इन चैनलों पर 99 रुपये में बाल यौन शोषण से जुड़ी अवैध सामग्री उपलब्ध कराई जा रही थी। सबसे गंभीर बात यह रही कि ये विज्ञापन इंस्टाग्राम की विज्ञापन मॉडरेशन प्रणाली से गुजरकर प्लेटफॉर्म पर लाइव हो गए।
फर्जी अकाउंट से सामने आई एल्गोरिदम की भूमिका
रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान बीबीसी ने भारत में एक फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट बनाया। इस अकाउंट से केवल 10 ऐसे प्रोफाइल फॉलो किए गए, जो आंशिक रूप से यौन संकेत देने वाली सामग्री साझा करते थे। दावा है कि एक सप्ताह के भीतर इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम उस अकाउंट को लगातार आपत्तिजनक विज्ञापन दिखाने लगा। कुछ दिनों में करीब 30 विज्ञापन कथित तौर पर बाल यौन शोषण से संबंधित और लगभग 20 विज्ञापन वयस्क अश्लील सामग्री से जुड़े दिखाई दिए।
मेटा ने स्वीकार की चूक
रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में इंस्टाग्राम ने एक रिपोर्ट किए गए विज्ञापन को अपनी नीतियों का उल्लंघन नहीं माना था। हालांकि, बीबीसी के सवालों के बाद मेटा ने कार्रवाई करते हुए संबंधित विज्ञापनदाताओं के अकाउंट निलंबित कर दिए और अवैध लिंक ब्लॉक कर दिए।
कंपनी का कहना है कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं होता और कुछ मामलों में नीतियों के पालन में चूक हो सकती है। मेटा ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों की जानकारी वह वैश्विक संस्था एनसीएमईसी (National Center for Missing & Exploited Children) को भी भेजती है।
सरकार की सख्त निगरानी
केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए मेटा से विस्तृत जवाब मांगा है। सरकार का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अवैध सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। फिलहाल सरकार मेटा के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रही है।



