NewsDelhiताज़ा तरीन खबरें

अक्षय तृतीया पर ‘प्रणव’ का भव्य लोकार्पण – डॉ. मोहन भागवत बोले, “संस्कृत भारत का प्राण”

वीना टंडन
नई दिल्ली, 20 अप्रैल:अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर राजधानी दिल्ली में संस्कृत के नवजागरण का नया अध्याय शुरू हुआ। संस्कृत भारती के नवनिर्मित केंद्रीय कार्यालय ‘प्रणव’ का भव्य लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ। इस मौके पर देश-विदेश से आए विद्वानों, शिक्षाविदों और संस्कृत प्रेमियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऐतिहासिक बना दिया।
“संस्कृत केवल भाषा नहीं, भारत की आत्मा”
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. भागवत ने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, परंपरा और जीवन-दृष्टि की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि भारत को समझने के लिए संस्कृत को समझना अनिवार्य है, क्योंकि इसी में हमारी ज्ञान-परंपरा और दर्शन निहित हैं।
उन्होंने ‘प्रणव’ नाम की व्याख्या करते हुए कहा कि यह सृष्टि के मूल नाद का प्रतीक है और इस नाम के साथ शुरू हुआ कार्य निश्चित रूप से पूर्णता की ओर बढ़ेगा।
“संभाषण ही समाधान” का मंत्र
संस्कृत सीखने के संदर्भ में उन्होंने “संभाषण पद्धति” को सबसे प्रभावी तरीका बताया। उनका कहना था कि बोलचाल के माध्यम से संस्कृत को आसानी से सीखा जा सकता है और इसे लोकभाषा बनाना समय की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री का संदेश: संस्कृत भविष्य की भाषा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संदेश में ‘प्रणव’ कार्यालय के लोकार्पण को भारतीय ज्ञान परंपरा के पुनर्जागरण की दिशा में अहम कदम बताया। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल अतीत की नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की भी सशक्त भाषा है।
वैदिक विधि से हुआ लोकार्पण
कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक परंपराओं के अनुसार हुई। गौपूजन और शतचंडी यज्ञ की पूर्णाहुति के बाद ‘प्रणव’ भवन का विधिवत उद्घाटन किया गया। आचार्य सुधीर वेदपाठी, प्रो. रामराज उपाध्याय और प्रो. परमानंद भारद्वाज के सान्निध्य में सभी अनुष्ठान सम्पन्न हुए।
‘प्रणव’ बनेगा वैश्विक संस्कृत केंद्र
संस्कृत भारती के संगठन मंत्री जयप्रकाश गौतम ने बताया कि लगभग 50,000 वर्ग फुट में बना यह अत्याधुनिक भवन परंपरा और आधुनिकता का संगम है। यहां संस्कृत के प्रचार-प्रसार, शोध, प्रशिक्षण और विभिन्न विषयों पर परामर्श की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
उन्होंने बताया कि 1981 में शुरू हुआ संस्कृत भारती का अभियान आज 28 देशों और भारत के 660 जिलों तक पहुंच चुका है और भविष्य में देश की 10% जनसंख्या तक संस्कृत पहुंचाने का लक्ष्य है।
देशभर के दिग्गज रहे मौजूद
समारोह में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वरिष्ठ नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी, सांसद अनुराग ठाकुर समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
इस अवसर पर सहयोग देने वाले 11 व्यक्तियों और संस्थाओं को सम्मानित भी किया गया।
नया केंद्र, नई उम्मीदें
‘प्रणव’ कार्यालय अब संस्कृत के वैश्विक प्रचार-प्रसार, शिक्षकों के प्रशिक्षण और शोध कार्यों का प्रमुख केंद्र बनेगा। यह पहल न केवल संस्कृत को नई पहचान देगी, बल्कि भारतीय संस्कृति को विश्व मंच पर और मजबूत करने में भी अहम भूमिका निभाएगी।

Related Articles

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Back to top button