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मुंबई में स्थापित होगा देश का पहला अत्याधुनिक ‘रीसाइक्लिंग स्किल डेवलपमेंट सेंटर’

रीसाइक्लिंग उद्योग में शिक्षित और कुशल मैनपावर की कमी दूर करेंगे अरविंद मेहता

वीना टंडन
नई दिल्ली।भारत में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग उद्योग को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने और ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ के संकल्प को सिद्ध करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। ऑल इंडिया प्लास्टिक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एआईपीएमए) के ‘अरविंद मेहता टेक्नोलॉजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप सेंटर’ (एएमटीईसी) और ऑस्ट्रिया की विश्व प्रसिद्ध प्लास्टिक रीसाइक्लिंग मशीनरी कंपनी ‘ईआरईएमए’ (ईआरईएमए) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी के तहत मुंबई में एक अत्याधुनिक ‘रीसाइक्लिंग स्किल डेवलपमेंट सेंटर’ की स्थापना की जाएगी, जो देश में कुशल मानव संसाधन की कमी को दूर करने में मील का पत्थर साबित होगा।

इस ऐतिहासिक अवसर पर एआईपीएमए गवर्निंग काउंसिल और एएमटीईसी (एएमटीईसी) के चेयरमैन श्री अरविंद मेहता ने रीसाइक्लिंग क्षेत्र की चुनौतियों और इस केंद्र की भविष्यगामी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान में भारत का रीसाइक्लिंग उद्योग एक बड़े संकट से जूझ रहा है और वह संकट है—शिक्षित और कुशल मैनपावर की भारी कमी। श्री मेहता ने अपने संबोधन में केंद्र की कार्यप्रणाली को स्पष्ट करते हुए कहा, “इस एमओयू के माध्यम से हमारा लक्ष्य छात्रों को किताबी ज्ञान से आगे ले जाकर सीधे उद्योग की जरूरतों के लिए तैयार करना है। यह सेंटर एक ‘व्यवस्थित स्कूल’ की तरह काम करेगा, जहाँ छात्रों को केवल कक्षा में नहीं, बल्कि वास्तविक मशीनों पर कच्चे माल और स्क्रैप की प्रोसेसिंग सिखाई जाएगी।”

इस समझौते के तहत इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों के छात्रों के लिए 75 घंटे का एक विशेष संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है। साझेदारी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ऑस्ट्रियाई कंपनी ईआरईएमए (ईआरईएमए) केंद्र को 50 से 100 किलोग्राम प्रति घंटा क्षमता की एक अत्याधुनिक रीसाइक्लिंग मशीन बिना किसी किराए के उपलब्ध कराएगी। इससे छात्रों को वास्तविक औद्योगिक वातावरण में ‘हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग’ मिल सकेगी। प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र उन्नत रीसाइक्लिंग तकनीक, सस्टेनेबिलिटी प्रैक्टिसेज और परिचालन उत्कृष्टता होगा।

कार्यक्रम के दौरान ईआरईएमए ऑस्ट्रिया के प्रबंध निदेशक मार्कस ह्यूबर-लिंडिंगर ने कहा कि बेहतरीन तकनीक को चलाने के लिए कुशल दिमागों की जरूरत होती है। बिना प्रशिक्षित मानव संसाधन के तकनीक का लाभ नहीं उठाया जा सकता। वहीं, एआईपीएमए के अध्यक्ष श्री सुनील शाह ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद छात्रों को सर्टिफिकेट दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी साझा किया कि कई डोनर्स सीएसआर फंड के माध्यम से इन छात्रों की शिक्षा में सहयोग कर रहे हैं, जिससे न केवल पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि वैश्विक स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के द्वार खुलेंगे।

यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्किल इंडिया मिशन’ और ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ के विजन से प्रेरित है। एएमटीईसी (एएमटीईसी) पहले से ही प्रोडक्ट डिजाइन, 3डी प्रिंटिंग और सस्टेनेबिलिटी जैसे क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं दे रहा है, लेकिन ईआरईएमए के साथ यह नई साझेदारी रीसाइक्लिंग के क्षेत्र में भारत को वैश्विक मानचित्र पर एक नई पहचान दिलाएगी। प्रशिक्षित छात्रों को न केवल भारत में, बल्कि ईआरईएमए के दुनिया भर में फैले वैश्विक ग्राहकों के नेटवर्क में भी रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। यह केंद्र न केवल उद्योग और शिक्षा के बीच की खाई को पाटेगा, बल्कि प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन के जरिए भारत के सतत विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने में भी सहायक होगा।

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